एक गुडिया की कई कठपुतलियों में जान है ,
आज शायर , ये तमाशा देखकर हैरान है।
खास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए ,
ये हमारे वक्त की सबसे सही पहचान हैं ।
एक बूड़ा आदमी है मुल्क में या कहो -
इस अधेंरी कोठरी में एक रौशंदान है ।
मसलहत आमेज होते हैं सीयासत के कदम ,
तू ना समझेगा सीयासत तू अभी इन्सान है ।
इस क़दर पाबंदी -ये-मजहब की सदके आपके ,
जब से आजादी मिली है मुल्क में रमजान है ।
कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुये ,
मैंने पूछा नाम तो बोला की हिन्दुसतान हैं ।
मुझमे रहते हैं करोडो लोग चुप कैसे रहूँ ,
हर गजल अब सल्तनत के नाम एक बयां है ।
Saturday, September 22, 2007
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