ओ शाम कुछ अजीब थी , ये शाम भी अजीब है
तू कल भी पास -पास थी , तू आज भी करीब है
Monday, January 5, 2009
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मैं क्या हूँ कुछ भी तो नही, एक साधारण मनुष्य जो अपनी जीवीका चलाने के लीए छोटी सी नौकरी कर्ता हूँ! और अपने विचारो को एक कापी मे लिखता हूँ जीसके कारण लोग मुझे आवारा, पागल, दीवाना कहते हैं आप भी मुझे कुछ भी कह सकते हो मुझे कोई कष्ट नही होगा , बस आप खुश रहे इसी मे मैं खुश हूँ