चाय आ जाती है तो वे प्रेमा से कहते है तेजी को भी आवाज दे दो जाग गई होगी यह नाम प्रकास के घर में पहली बार सुनता हूँ मुझे बताया जाता है की तेजी मिस तेजी सूरी है फतेह चंद कालेज लाहौर में सैकोलोजी padati हैं जहाँ प्रेमा principal होकर गई हैं प्रेमा लाहौर मे इन्ही के साथ रहती थी बडे दिन की छुत्तियो मे प्रेमा बरेली आने लगी तो तेजी को साथ लाई साथ के इतने मी एक पल्ला !
itne me दरवाजा का ek palla धीमे से खुलता हैं और मिस सूरी कमरे मी प्रवेश करती हैं मुस्कराती, मझोले कद की, इकहरे बदन की , गौर वर्ड की, चेहरा अंडाकार, आखें बड़ी , नाक लंबी, होठ न bharen पतले , दांत चमकीले, और बिल्कुल ग्रीक महिला का सा मुख उन्होने अपने चेहरे को चारो तरफ से एक स्याह पतली चुन्नी लपेट रक्खी थी और्जिसमे उनके चेहरे का गौर वर्ड निखर उठता था आंखो मे नीद की नरमी अभी अटकी- अटकी उन्होने फल्सी रंग की सलवार - कमीज पहन रक्खी थी और जल्दी मे कोई उनी कोट दाल लिया था उनके कमरे मे परवेश करते ही मैं उठ कर खडा हो गया प्रेमा ने उनका परिचय दिया 'मेरी सहेली तेजी' प्रकाश ने मेरा परिचय दिया 'मेरे MITRA बच्चन ' उनका रूप प्रथम DRISTI मे किसी को भी अभिभूत करने को प्रयाप्त था फ़िर सब लोगो मिल कर चाय पी और चाय पर ही प्रकाश ने अपनी कुछ प्रिय कविताएं सुनने की जिद की तो मैं सुनाया और मिस सूरी पर क्या प्रभाव हुआ शायद ही मैं ने जानना चाहा !
Sunday, December 30, 2007
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